Published Article in उड़ान ... एक अनुभूति। A quarterly magazine
पर्वत की विडंबनाएँ यूँ तो भारत अपने विभिन्न कारणों से पर्यटन का केंद्र है लेकिन एक ऐसा भी हिस्सा है जो देसी/विदेशी सभी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, और वह है यहाँ के पहाड़ और उनका मनोरम वातावरण, प्राकृतिक सम्पदा और पहाड़ियों की मासूमियत में लिपटी सादगी सी भरी खुशमिजाज़ ज़िन्दगी। आप चाहे उत्तर या उत्तर-पूर्वी पहाड़ियों पर आच्छादित बर्फ़ का आनंद उठाना चाहते हो या दक्षिण भारत या पश्चिमी भारत के बादलों से घिरे पहाड़ों का आनंद उठाना चाहे, सबका एक अलग आनंद होता है। और फिर दुधिया रँग से प्रतीत झरने जो आपको भी मचलने के लिए विवश कर देते है। चहल कदमी करते मिल ही जाती है फूलों की क्यारियाँ फिर क्या कश्मीर, शिमला या ऊटी। झुके बादलों को देख कर लगता है अभी पकड़ कर रख लूँ या फिर इनमे ही कहीं छुप जाऊँ। ठंडी हवा के साथ ओस के बूंदों की छुअन जीने की ललक बढ़ा जाती है। सँकरे रास्तों से गुज़रते हुए मूल निवासियों की मुस्कान देख कर लगता कि कैसे खुशहाल सी ज़िन्दगी को हमने उलझा रखा है। किसी भी पर्यटक के नज़रिए से पहाड़ पर बसने की ख्वाहिश शायद आखरी होती होगी, लेकिन यह रूमानी ऐनक उतार कर शायद ही कोई पहाड़ियों के संघर्ष...