Story: Let's make a Life...!

सिकंदर अपनी आदतानुसार आज फिर Sunday को भी सुबह उठकर सबसे पहले Twitter check किया। हलकी धुन पर Bryan Adams का एक song play किये हुए था "let's make a night, to remember", सोचा आज कुछ ऐसा ही रूमानी status डाला जाए। बगल में लेटी समा को उसने एक प्यार भरी नज़र से देखा और status चिपका दिया "आज हुस्न लेटा है मेरे सिरहाने, मैंने इश्क की चादर उसपर डाल दी....कहीं सुबह की नज़र न लग जाये"।
तभी समा ने आँखें खोली और सिकंदर को पता है वह एक kiss के बाद ही उठेगी। दोनों पिछले 3 सालों से live-in में रहते आ रहे थे और यह उनकी रोज़ की आदत थी।

समा उठते ही पूछी आज क्या लिखा तो सिकंदर ने बता दिया। breakfast के बाद समा ने कहा आज घर पर ही रहेंगे। सिकंदर ने भी हामी भर दी और बता दिया कि आज प्रियँका विवेक के साथ आने वाली है। समा भी खुश थी क्यूंकि प्रियँका दोनों की पुरानी दोस्त थी और वह दोनों विवेक से अभी तक नही मिले थे। सिकंदर ने समा से कहा आज शाम को official party है pub में जिसमे उसे जाना होगा और इस बार वह उसे नही ले जा पायेगा। थोड़ा रूठना मनाना चला लेकिन समा मान गयी।

दोपहर करीब 2 बजे प्रियँका और विवेक पहुँचे कुछ starters और vodka के 1 बोतल के साथ। दोपहर मस्त हो गयी। चरों खूब हँसी-ठट्ठा कर रहे थे और वक़्त बीत रहा था। सिकंदर की नज़र घड़ी पर पड़ी और समा को इशारा किया की अब उसे निकलना होगा party के लिए। फिर थोड़ा रूठना मनाना हुआ चूँकि प्रियँका और विवेक थे तो उसने भी समझाया की अकेला तो नही छोड़ रहा और सिर्फ़ 2-3 घंटे की बात है।

इधर सिकंदर की party शुरू थी pub में और उधर घर पर कुछ और माहौल हो गया था। सिकंदर को पहले फोन आया समा का कि उसे बहुत miss कर रही है इसपर सिकंदर ने कुछ समझाया। एक घंटे बाद फिर प्रियँका की call आयी की समा ने बहुत ज़्यादा drink कर लिया है। अब सिकंदर को चैन नही था लेकिन official party होने के वजह से उसे आधे घंटे के बाद फ़ुर्सत मिली और वह सीधा घर की तरफ दौड़ा था।

दरवाज़ा खुलते ही उसे एक रूम से समा का ज़ोर ज़ोर चिल्लाना सुनाई दिया। वह बस ऊँची आवाज़ में सिकंदर के mom-dad को गाली दे रही थी तो कभी सिकंदर को। कभी कहती vivek i love you, कभी कहती उसे सिकंदर से भी ज्यादा चाहने वाले उसके भी office में है। अब सिकंदर को सब याद आ रहा था की पिछले महीने जब उसके mom-dad पहली बार आये थे समा से मिलने और घर पर ही रुके थे...तब शायद कुछ ऐसा हुआ था क्यूँकी उसके mom-dad ने भी पिछले एक महीने से बात करना छोड़ दिया था।

पूरी रात समा का वही हाल रहा। दुसरे कमरे में प्रियँका और विवेक चुपचाप थे। सिकंदर बस पूरी रात समा के उलटी से सने कपड़े और चादर बदलता रहा और सोच रहा था प्यार को अंजाम दे या mom-dad की मर्ज़ी मान ले।

Comments

Popular posts from this blog

Article

Khamoshiyon ki baaten...!

Published Article / Bhopal Samachar