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हाजी अली के दरगाह से..।
नारी सशक्तिकरण के दौर में हर सोशल साइट का वही हाल है जो घर में किसीं पति का होता है। मुँह खुला आपका की मायके के दिन से लेकर घर प्रवेश के पहले तक के फायदे और उसके बाद का उलाहना बरस पड़ेगा। क्या करें, दौर ही ऐसा है कि पँक्ति के हिसाब से किसी की बारी आ ही नहीं पाती।
खैर, जहाँ ट्रिपल तलाक़ तीन तिगाड़ा वाले मुहावरे के चक्कर में वोट बटोरने में लगी हुई थी वहीँ पँक्ति तोड़कर हाजी अली में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना तिलक लगा दिया है। युँकी देखने वाली बात है कि जिस मुद्दे पर लोग बर्तन बजाते रहते है उस पर कोई ध्यान ही नहीं देता। हद्द है नज़र अंदाज़ करने की ऐसी कवायद। लेकिन इस फ़ैसले से महिलाओं का फायदा होगा या वोट बटोरने वालों का यह तो किसी सेल्फी सी ही पता चलेगा।
मज़े की बात एक और है कि इसका श्रेय लेने के लिए अब जो होड़ लगेगी वही देखने लायक होगा। बिल्ली के भाग्य से छींका ऐसा टुटा है कि माहौल कहीं रायता न हो जाए। बस अब बाकि ऐसे मुद्दे पर कोर्ट अपनी चिमटे से सब सेंक दे तो हम भी यहाँ कुछ छाप देंगे।
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