Story
Literature, Present hai माई Lord..!
परवीन शाकिर बंधी थी और रूमी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि सूफियाना नाच कब शुरू करना है। शेक्सपियर ने खैनी को पीट कर अपने होठों में दबा के lao tzu के तरफ देखते हुए कनखी मारी और मुंशी प्रेमचंद को छेड़ने के अंदाज़ से पूछा, " अरे लुजुआ, कितने किताब छपवा लिए बे?
लुजुआ को भी मौका मिला जताने का कितना क़ाबिल है, कालर चढ़ा के और धोती समेट के बोला, "सरदार तीन छपवा चुके हैं अब सोच रहे हैं कुछ नया लिखें"
शेक्सपियर ने व्यंगात्मक हँसी में पूछा, "का का लिखे हो, बताओ तो?"
लुजुआ ने तुरंत धोती के अंदर से तीन किताबें निकाल ली और दिखाते हुए कहा, "ई रहा, पहला I wanted to have sex but i couldn't, दूसरा Being Half Impotent और ई तीसरा Ten drops in Water"
प्रेमचंद अब भी सर नीचे गड़ाए मिट्टी खोद रहे थे।
शेक्सपियर ने लुजुआ से कहा, "तुम साले लव स्टोरी के आड़ में यही सब लिखो, इससे अच्छा तो कामसूत्र को ही अपने नाम से छपवा लेते बे, प्रेमचंद से सीखो साला आजतक सोच ही रहा है कि क्या लिखें की इसकी भी किताबें बिके।"
प्रेमचंद को अपना नाम सुनते ही जैसे लगा उसकी कोई किताब बिक गयी। सर ऊपर कर के देखा तो सब हँसने लगे।
मरे मन से कहा उसने, "भैया, जमाना ऐसा बदला है कि हर चीज़ में रीमिक्स आ गया है, हमको तो समझ ही नहीं आ रहा किसका कितना मात्रा में रीमिक्स करें।"
शेक्सपियर को तुरंत जैसे कुछ याद आ गया, परवीन शाकिर की तरफ देखा और बोला, "अरे शायरा थोड़ा नाच के भी दिखाओगी या बस नखरे ही काटोगी?"
तुरंत रूमी खड़े हो गए और लगे गोल घूमने।
उन्हें देख सिडनी शेल्डन ने कहा, "भाई कितना नाचते हो घाघरा पहन के, लेकिन हम को तो परवीन का ही नाचना देखना है।"
फैज़ अहमद फैज़ ने हिदायत दी, "शर्म करो क़ाफ़िर, जनाना को ऐसे नहीं सताते।"
परवीन को भी हँसी आ गयी और उसने कहा, "हम मौसिक़ी के किरदार हैं, बाकि जो आप हमसे करवाना चाह रहे है, वो तो रूमी ही कर पाएँगे।"
इतने देर में वी शांताराम अपने कटे हुए हाथ के साथ हाज़िर हुए।
तुरंत लुजुआ ने कहा, "अरे ठाकुर, कभी हमरे किताब पे कोई फिल्म बनाओ न? ऐसा स्क्रिप्ट लिख देंगे की ई सिडनी भी भोजपुरी लिखने लगेगा"।
शांताराम ने कुछ नहीं कहा, सबको ध्यान से देखा और शाल गिरा दिया। सभी आश्चर्य में थे। क्योंकि उनके हाथ में दो टिकट थी और दोनों अलग नाटक की थी, एक स्टीफेन किंग की और दूसरी जॉन ग्रीषम। रूमी नाचने में गुम थे और फैज़, परवीन को बेड़ियों को खोल रहे थे।
लुजुआ ने पूछा, अंग्रेजी में होगा क्या नाटक?"
ठाकुर/शांताराम ने ना में सर हिलाया।
शेक्सपियर तुरन्त हरकत में आया, कूद कर उसने तुरँत टिकट छीन लिया और बोला, "बहुत दिन से साला कुछ रीमिक्स नही देखा है।"
©Abhilekh
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