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No Lust, Only Wander!

शुन्य की ओर ...  हर वीक में एक दिन ऐसा ज़रूर आता है, जब मन करता है कि किसी ऐसी जगह के लिए निकल जाऊँ जहाँ सब हों और सब मुझसे अनजान हों। इसके लिए सड़क है, सोशल मीडिया है और कई सारे माध्यम हो सकते हैं जहाँ, होकर भी सबकुछ भुलाया जा सकता है। मेरे लिए ऐसी जगह सिर्फ पहाड़ है लेकिन लद्दाख के सूखे और मरे पहाड़ नहीं, हरे-भरे पहाड़ जहाँ सब कुछ सूखने के बाद भी नमी की परत बिछी होती है। मुझे आजकल इन्हीं जगहों पर हमेशा खोने का मन करता है।  कोरोना के आने से पहले मेरे लिए ऐसी जगह सिर्फ एक ट्रेवलिंग डेस्टिनेशन जैसी थी जहाँ कुछ दिन समय बिताने के बाद वापस आना होता था, हालाँकि मुझे लौटना पसंद नहीं है लेकिन मैं कई बार कुछ सफर से लौट आया हूँ। पता नहीं तब सही किया था या नहीं, पता आज भी नहीं है लेकिन अब सिर्फ इतना लगता है कि लौट कर जो हासिल किया है क्या वो बिना लौटे हासिल किया जा सकता था? और अगर आज  हासिल है तो वो कब तक रहेगा? इसलिए अब और ज़्यादा इच्छा होती है की सबको छोड़कर कहीं गुम हो जाऊँ। ज़िम्मेदारियों से भागना चाहता हूँ? पता नहीं... मुझे काफी साल हो गए हैं जॉब करते हुए इसलिए कभी-कभी लगता है कब तक च...

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हाजी अली के दरगाह से..। नारी सशक्तिकरण के दौर में हर सोशल साइट का वही हाल है जो घर में किसीं पति का होता है। मुँह खुला आपका की मायके के दिन से लेकर घर प्रवेश के पहले तक के फायदे औ...

Story: अपशकुन।

सीता: रघुवर, आपके मन में कहीं यह संदेह तो नहीं, कि मेरा आपकी ज़िन्दगी में आना तमाम कठिनाईयों और परेशानी की कारण हूँ, मेरा मतलब यह है कि कहीं मैं आपके जीवन में किसी अपशकुन की तरह तो नहीं हूँ न? सीता ने फलों को धोते हुए सवाल तो किया था लेकिन उसने बिना नज़र मिलाए ऐसे प्रश्न किया था, जिसपर प्रभु राम को आश्चर्य भी था और संदेह भी। वह बाणों को व्यस्थित कर सीधे सीता के करीब आ खड़े हुए। कुछ पल के मौन के बाद सवाल किया, " तुम्हे ऐसा क्यूँ लगता है सीते?" मेरे आने के बाद से, समय ने इस तरह करवट ली, जैसे लगता है सब मेरे आने के वजह से हुआ हो। तुम बेवजह सोच रही हो, यह सब विधि के विधान से हो रहा है। सीता ने राम के तरफ से अनुराग से देखा, एक सवाल आँखों में था कि आप कैसे कह सकते हैं, लेकिन राम के आँखों और होठों की मुस्कराहट ने उसके सवाल को भटका दिया था। सवाल कहीं ओझल थे लेकिन राम के जवाब वहीँ मौजूद होकर नतमस्तक थे। राम ने कहा, " हमारा मिलना भी विधि के विधान से हुआ है सीते। मुझे स्वयम्वर में ऋषि विश्वामित्र लेकर आए थे लेकिन हम दोनों को मिलना था, वरना अनेक शूरवीरों की मौजूदगी ...