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Showing posts from October, 2016

Story: अपशकुन।

सीता: रघुवर, आपके मन में कहीं यह संदेह तो नहीं, कि मेरा आपकी ज़िन्दगी में आना तमाम कठिनाईयों और परेशानी की कारण हूँ, मेरा मतलब यह है कि कहीं मैं आपके जीवन में किसी अपशकुन की तरह तो नहीं हूँ न? सीता ने फलों को धोते हुए सवाल तो किया था लेकिन उसने बिना नज़र मिलाए ऐसे प्रश्न किया था, जिसपर प्रभु राम को आश्चर्य भी था और संदेह भी। वह बाणों को व्यस्थित कर सीधे सीता के करीब आ खड़े हुए। कुछ पल के मौन के बाद सवाल किया, " तुम्हे ऐसा क्यूँ लगता है सीते?" मेरे आने के बाद से, समय ने इस तरह करवट ली, जैसे लगता है सब मेरे आने के वजह से हुआ हो। तुम बेवजह सोच रही हो, यह सब विधि के विधान से हो रहा है। सीता ने राम के तरफ से अनुराग से देखा, एक सवाल आँखों में था कि आप कैसे कह सकते हैं, लेकिन राम के आँखों और होठों की मुस्कराहट ने उसके सवाल को भटका दिया था। सवाल कहीं ओझल थे लेकिन राम के जवाब वहीँ मौजूद होकर नतमस्तक थे। राम ने कहा, " हमारा मिलना भी विधि के विधान से हुआ है सीते। मुझे स्वयम्वर में ऋषि विश्वामित्र लेकर आए थे लेकिन हम दोनों को मिलना था, वरना अनेक शूरवीरों की मौजूदगी ...

2 Published Articles / UP Patrika

दरगाह से सशक्तिकरण तक। http://uppatrika.com/read-news.php?newsid=3456 सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले से जहाँ इस बात की मुहर लगा दी की सबको समान हक़ होगा हाजी अली दरगाह पर जाने का वहीँ अब ट्रिपल तलाक के मुद्दे को हवा देने की सरगर्मी शायद तेज़ हो जाए। अच्छी बात यह है कि साल खत्म होने से पहले इसपर फैसला आया है और ऐसे और भी संवेदनशील मुद्दे कोर्ट में लटके हुए हैं जिसपर राजनीति पुरे ज़ोर-शोर से हो सकती है। इन दोनों मुद्दे पर जहाँ राजनीती गर्माने का मौका ढूँढती रही है अब एक के निपटने से, उसके हिस्से का श्रेय लेने की भागमभाग शुरू हो जाएगी। एक तरफ जहाँ मुस्लिम महिलाओं के लिए एक खुशखबरी है वहीँ कुछ लोगों के लिए खतरे की भी आशंका है कि कहीं इस तरह हर बात पर कोर्ट न हस्ताक्षेप करने लगे। आने वाले दिनों में देखना यह दिलचस्प होगा की क्या इस जीत को सिर्फ नारी सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जाएगा या वाक़ई इंसानियत की जीत मानी जाएगी। जहाँ संविधान सबको समान हक़ देने की बात करता है और धार्मिक उन्माद अक्सर उसमे रोड़ा बन जाती है , यह देखना दिलचस्प होगा की क्या आगे भी ऐसे फ़ैसले के लिए कोर्ट का ही दरवाज़े पर जाना होगा या...

Story / दिवाली: कहीं रौशनी कहीं अँधेरा।

A Short Story दिवाली : कहीं रौशनी, कहीं अँधेरा "तनख्वाह आ गयी माँ ", रवीश ने घर में घुसते हुए माँ से कहा। माँ ने ईश्वर को धन्यवाद दिए कि इस बार सही समय पर पैसे घर आ गए क्यूंकि बस दो दिन ही रह गए थे दिवाली के लिए और कितने सारे घर के काम अभी भी रह गए थे, उस पर से नौकरानी भी नही आ रही थी 2 दिन से। रवीश कि माँ ने नौकरानी के घर कहलवा दिया था कि घर की साफ़ सफ़ाई बाकी रह गए हैं इसलिए आ जाये नही तो 2 दिन के पैसे भी कटेंगे और दिवाली कि बख्शीश भी नहीं मिलेगी। अगले सुबह 9 साल का मासूम सा लड़का चंदू, उनके दरवाज़े पर खड़ा था। रवीश की आज छुट्टी थी, बाहर आकर पूछा तो लड़के ने बोला माँ ने भेजा है घर का काम करने के लिए। सुनकर रवीश कि माँ बाहर आयी और काम करवाने से मना कर दिया। लड़का मायूस होकर वापस लौट कर चला गया और अपनी माँ से सारी बात बता दी। रमा चिंतित हो गयी क्यूँकि उसकी तबियत इतनी खराब थी कि वो वह उठ कर पानी भी नहीं पी सकती थी। सारा दिन बिस्तर पर लेटे हुए गुज़रता था और इतने पैसे नही थे कि पास के किसी डॉक्टर से दिखवाए, दवाखाने से तो कई दिन से दवा लेकर भी कोई सुधार नहीं था। चंदू सबके घरो...

Story / बचपन वाला दिलवाले

बचपन आसमान में उस चिड़िया की जैसी होती है जिसकी पहचान तो नहीं कर पाते फिर भी उसे उड़ते देखते लगता है कि कभी हम भी ऐसे ही थे। और सबसे ज़्यादा हँसी तब आती है जब अपने बचपने में किसी से ...

Published Article / UP Patrika

कॉपीराइट का सेहरा कौन बाँधे। यूँ तो अपने देश में कॉपीराइट एक्ट थोड़ी कमज़ोर है, फिर भी जिसके हाथ में लाठी होती है भैंस उसी के खूँटे में नज़र आती है। वाह-वाही किसे पसंद नहीं होती ...

Published Article / Bhopal Samachar

विकास बनाम मुफ़्तख़ोरी। अपने यहाँ विकास, मशहूर किताब जँगल बुक के मुख्य किरदार "मोगली" की तरह है। हर 5 साल पर उसके पालनहार बदल जाते है और वह अपनी आदतानुसार कभी इस राज्य से उस राज्...

Published Article / Bhopal Samachar

बँगाल में त्यौहार पर सियासत।। जिस तरह मौसम आते जाते रहते है ठीक वैसे ही हमारे यहाँ त्यौहार भी हर साल आते जाते रहते है लेकिन चीरकाल का बसंत-बहार का वरदान अगर किसी को प्राप्त है तो वह है हमारे देश की सियासत। हर राज्य में, हर पार्टी हमाम में नंगे होकर एक दूसरे को ढकने की नसीहत देते रहते हैं। और जहाँ पानी की किल्लत शुरू होती है सब मिलकर हमाम के मालिक पर दोष का पेड़ रोप देते हैं। वैसे भी ऊपर वाले को दोष देना आसान होता फिर चाहे वो आपके मकान के ऊपर वाले मंज़िल पर ऊँघने वाला हो या फिर नीली छतरी के ऊपर वाली मंज़िल पर अपनी तोंद को कम करने के चक्कर में चहल कदमी करने वाला। एक बात और, आजकल नीले गगन के ऊपर जितनी साम्प्रदायिकता नहीं होती होगी उससे ज़्यादा नील गगन के ताले होने लगे हैं और इसी को चढ़ावा देने में बँगाल ने थोड़ी कोशिश की थी। हो सकता है उनका मक़सद हंगामा खड़ा करना था लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट ने नौटंकी को सिरे से खारिज कर के सारा नारियल बिना फोड़े पूजा और बिना शरबत के ताजिया की यात्रा भी पूरी करवा दी। हाजमे की गोली टटोल ही रहा था तो देखा 1982 और 1993 की शीशी अभी भरी है। उस वक़्त भी आज का इतिहास, वर्...

Published Article / UP Patrika

क्रिकेट, कलाकार और देश-प्रेम। जहाँ भावनाएँ जागृत होती है वहाँ जूनून भी अपनी मौजूदगी ज़रूर जताता है। और भारत में जहाँ सहनशीलता है वहीँ आत्मीयता भी है इसलिए हम भारतीय भावुक औ...