No Lust, Only Wander!

शुन्य की ओर ... 


हर वीक में एक दिन ऐसा ज़रूर आता है, जब मन करता है कि किसी ऐसी जगह के लिए निकल जाऊँ जहाँ सब हों और सब मुझसे अनजान हों। इसके लिए सड़क है, सोशल मीडिया है और कई सारे माध्यम हो सकते हैं जहाँ, होकर भी सबकुछ भुलाया जा सकता है। मेरे लिए ऐसी जगह सिर्फ पहाड़ है लेकिन लद्दाख के सूखे और मरे पहाड़ नहीं, हरे-भरे पहाड़ जहाँ सब कुछ सूखने के बाद भी नमी की परत बिछी होती है। मुझे आजकल इन्हीं जगहों पर हमेशा खोने का मन करता है। 

कोरोना के आने से पहले मेरे लिए ऐसी जगह सिर्फ एक ट्रेवलिंग डेस्टिनेशन जैसी थी जहाँ कुछ दिन समय बिताने के बाद वापस आना होता था, हालाँकि मुझे लौटना पसंद नहीं है लेकिन मैं कई बार कुछ सफर से लौट आया हूँ। पता नहीं तब सही किया था या नहीं, पता आज भी नहीं है लेकिन अब सिर्फ इतना लगता है कि लौट कर जो हासिल किया है क्या वो बिना लौटे हासिल किया जा सकता था? और अगर आज  हासिल है तो वो कब तक रहेगा? इसलिए अब और ज़्यादा इच्छा होती है की सबको छोड़कर कहीं गुम हो जाऊँ। ज़िम्मेदारियों से भागना चाहता हूँ? पता नहीं...

मुझे काफी साल हो गए हैं जॉब करते हुए इसलिए कभी-कभी लगता है कब तक चलेगा ये सब और क्यों चलाना है ये सब? अब मैं किसी ऐसी जगह बैठना चाहता हूँ जहाँ मुझे कोई देखे या दिखूँ भी तो ना उसे कुछ फर्क पड़े और ना मुझे। मेरे साथ ऐसा हुआ भी है लेकिन ऐसा अक्सर हो तो शायद कुछ तसल्ली हो! नैनीताल के पास नींब करौरी बाबा के आश्रम में ऐसा लगा था, कूर्ग के पास बुद्धिस्ट मोनैस्ट्री में ऐसा लगा था, मणिपाल के पास मलपे समुन्द्र के किनारे भी यही लगा था। इतने और ऐसे कई मौके थे जहाँ मुझे जब ऐसा कुछ महसूस हुआ, तो लौटना पड़ा। लौटना ज़रूरी भी था, और लौट कर कहाँ तक आ चुका हूँ, ये आज भी नहीं समझ आ रहा। 

वक़्त और हालत ऐसे हैं कि सबकुछ छोड़ने का बहाना बनाना बहुत आसान लग रहा है। कुछ आश्रमों के लिए रिसर्च भी कर लिया है। बस, डर इस बात का लगता है कि वहाँ से भी भागने की इच्छा हुई तो कहाँ जाऊँगा क्योंकि लौटना बहुत हो चुका है। अब इतना आगे निकल जाना है कि जब लौटने के लिए सोचूं या देखूँ तो शून्य नज़र आये। जबकि जाना मुझे शुन्य की ओर ही है। किसी मंदिर का पुजारी बन कर भी गुज़ारा कर सकता हूँ और किसी आश्रम का चाकर भी, बस मुझे ये एहसास हो जाए कि यहीं शुन्य है और यहीं इकाई है।

देखते हैं, कब तक पहुँच पाता हूँ। इतना ज़रूर है कि पहुँच ज़रूर जाऊँगा।

~ अभिलेख

Comments

Popular posts from this blog

Article

Khamoshiyon ki baaten...!

Published Article / Bhopal Samachar