IPL... हरफनमौला।

IPL यानि Indian Premier League.... यह हमारे देश का national craze में से एक है। जैसे national ध्वज/गीत/फुल है, वैसे यह भी एक राष्ट्रिय स्तर का दिवानापन है। यह एक ऐसी शुरुआत थी, जिसने क्रिकेट के खेल में क्रांति ला दी थी। यह अलग बात है इससे देश में खेल के साथ पैसा भी हावी हुआ और जो कुछ बचा तो सट्टे और घपलेबाज़ी ने पता नही कितने चाँद लगा दिए। वैसे इन्ही अनगिनत चाँद के वजह से ही इतनी प्रसिद्धी भी मिली। अब जैसे कि भेड़चाल ही हमारी रीति-रिवाज़ है तो इसकी देखा-देखी भी शुरू हो गयी ताकि बहते नाले में अच्छे से मुँह धुल जाये।

क्रिकेट से शुरू हुई IPL अब राजनीति में भी नज़र आने लगी है। इसलिए अब राजनीति को कुछ लोग Indian Political League के नाम से बोल रहे है और सही भी है। क्यूँकी यहाँ भी Corporate पैसे लगाती है, हर नेता बिकता है और फ़िर जोड़-तोड़ की बैठक से पार्टी बनती है। फ़िर सब एक दुसरे के ऊपर गालियों की बौछार करते है, क्यूँकी इनके हाथ में बल्ला और गेंद देने की गलती नही कर सकते नही तो सरेआम संसद का तमाशा मैदान में शुरू हो जायेगा। इन सब के साथ एक और IPL होता है जिनमे media सबसे अहम किरदार निभाती है, उसे कहते है Indian Polling League. बड़ी ही ईमानदारी से, लेकिन  पता नही कहाँ से, कैसे और किससे survey करवाते है की लगता है चुनाव भी हो गया और वोट भी गिर गए। ठीक वैसे ही जैसे खिलाड़ियों के मैदान पर उतरने से पहले उनका ऐसा बखान किया जाता है कि बस अकेले एक खिलाड़ी पूरी श्रंखला जीत लेगा। जैसे खेल में खिलाड़ियों की चर्चा के लिए commentators ज़रुरी होते है, ठीक वैसे ही नेताओं के लिए media है। इसलिए इन दोनों के रवैये से एक को Idiotic Personalized League से नवाज़ा जाना चाहिए और survey को Idiot's Polling League का दर्ज़ा देना चाहिए।

गौर करेंगे तो एक बात और सामने आती है, वह यह कि हमारे Indian Political League के महानुभाव आज तक border पर बस Indian Peace League को ज़बरदस्ती थोपना चाहते है और अपने ढीले, गैरजिम्मेवार रवैये से Infiltration Permission League को ज़रूर बढ़ावा दे रहे है। पता नही कब तक अपने जवान अपना सर मुफ़्त में गँवाते रहेंगे और हम Indian's Pessimistic League का उदहारण देते रहेंगे। Indian Police League तो वैसे भी सबसे ज़्यादा ईमानदार और कर्तव्य-निष्ठ है तभी तो जनता इतना मिसाल देती है। अपने देश का कानून भी Individual's Programmed League हो चला है क्यूँकी अब सज़ा और उसमे माफ़ी/रियायत भी रुतबे/शख्सियत/ओहदे को देखकर दी जाती है।

लोगों को बेवकुफ़ बनाना, उनका पैसा लूटना और वक़्त बर्बाद करना .. यही IPL का मक़सद है। क्यूँकी इन्हें भी पता है कि अगर इस देश में अपना धंधा चलाना है तो हर किस्म के IPL को बढ़ावा देना होगा। और हम जनता भी मनोरंजन और रोमांच के चक्कर में बाद में यह सोचते है कि अब तक हमने क्या खोया है।

खैर, IPL का दौर है.. आप भी कोई IPL से जुड़िये और अपना रास्ता बनाइये।

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