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Showing posts from June, 2016

Khamoshiyon ki baaten...!

खामोशियाँ बेबाक होती है और उदंड भी। संवाद, मन-मर्ज़ियों का फ़रेब ले कर अक्सर एक मोड़ ले लेती है और उड़ेल देती है खामोशी..। शुन्य सी होती है वह ख़ामोशी लेकिन साथ देने की हिम्मत कोई सं...

अंतर्मन की बातें... और अधूरापन।

मन की सूखी मिट्टी से सिर्फ ढेर बनती है, लेकिन हलकी सी नमी मिल जाए तो आकार लेना स्वाभाविक होता है...और फिर वह नमी अक्सर ज़िन्दगी को एक मोड़ पर नयी पहचान देती है। लेकिन यह भी ज़रूरी है...