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  सौंदर्य और बदलते वक़्त में उसका परिदृश्य Pic Courtesy : Google सौंदर्य इन्सान का वो अभिन्न हिस्सा है जिसके बगैर वो हमेशा अपने को अधुरा समझता है। यह एक चरित्र का हिस्सा है जिसका उल्लेख हर विषय और काल में मिलता आया है। वहीँ सौंदर्य कभी विषय - वस्तु के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। आज से नही बल्कि आदिकाल से यह खेल के रूप में भी प्रस्तुत हुई है। वेद - पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है की किस तरह देवताओं ने तपस्या करने वालों का ध्यान भंग करने के लिए अप्सराओ का सहारा लिया था। उन्होंने तो सुंदर स्त्री का रूप धर कर दत्यों का भी नाश किया था , लेकिन वह उन्होंने जन कल्याण और सत्यता की जीत के लिया किया था। Pic Courtesy : Google लेकिन अब तो कलयुग है और आज के काल में सौंदर्य की महत्ता कुछ और हो गयी है। अब सौंदर्य आदिकाल के ठीक विपरीत परिस्थितयों में बसर कर रहा है , क्यूँकी अब सौंदर्य सिर्फ विषय - वस्तु है जिसकी लोलुपता ...