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Showing posts from July, 2020

Sky is the limit... A myth!

क्या वाक़ई ये किसी हद की सीमा है? आसमान की ऊँचाई पर पहुँच कर सबसे पहले तो ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ेगी तो फिर ऐसी ऊँचाई किस काम की जहाँ दम घुटने लगे? उसपर से 'पुष्पिंदर' को ढोने का अलग से सिरदर्द! आपका 'मैनी' अपना ऑक्सीजन ढोयेगा या आपका? इसलिए मुझे लगता है ऐसी इंस्पायरिंग लाइन को अब साइड कर देना चाहिए। जब 'नई एडुकेशन पॉलिसी' खुद को 34 साल ले सकती है बदलने में तो ऐसे बेमतलब के फ्रेज नहीं बदलना चाहिए? ना तो ये बताया गया है की आसमान के किस परत को छूना है और ना ही किसी परत पर रुकना का कोई ठिकाना है कि आदमी ये सोचे कि रुकना कहाँ है! अगर खुद ही तय करना है तो फिर ऐसे सफर के लिए निकलना क्यों? वैसे आदमी और आसमान से ये भी ध्यान आता है कि आसमान छूने वाले तो गिने-चुने एस्ट्रोनॉट ही होते हैं। कुछ हद तक लड़ाकू विमान चालक भी, हाँ अपने रफएल / राफेल वाले भी। फ्लाइट में बैठकर तो छूने को मिलता नहीं, उसपर भी फ्लाइट-बाला कभी पर्दा गिराओ और कभी उठाओ लगाए रहती है। कभी-कभी तो लगता है धीरे-से फेवीक्विक लगा दूँ ताकि झंझट खत्म हो। लेकिन मुद्दे की बात ये है कि आपको आसमान छूने को नहीं मिलता है।  हा...

No Lust, Only Wander!

शुन्य की ओर ...  हर वीक में एक दिन ऐसा ज़रूर आता है, जब मन करता है कि किसी ऐसी जगह के लिए निकल जाऊँ जहाँ सब हों और सब मुझसे अनजान हों। इसके लिए सड़क है, सोशल मीडिया है और कई सारे माध्यम हो सकते हैं जहाँ, होकर भी सबकुछ भुलाया जा सकता है। मेरे लिए ऐसी जगह सिर्फ पहाड़ है लेकिन लद्दाख के सूखे और मरे पहाड़ नहीं, हरे-भरे पहाड़ जहाँ सब कुछ सूखने के बाद भी नमी की परत बिछी होती है। मुझे आजकल इन्हीं जगहों पर हमेशा खोने का मन करता है।  कोरोना के आने से पहले मेरे लिए ऐसी जगह सिर्फ एक ट्रेवलिंग डेस्टिनेशन जैसी थी जहाँ कुछ दिन समय बिताने के बाद वापस आना होता था, हालाँकि मुझे लौटना पसंद नहीं है लेकिन मैं कई बार कुछ सफर से लौट आया हूँ। पता नहीं तब सही किया था या नहीं, पता आज भी नहीं है लेकिन अब सिर्फ इतना लगता है कि लौट कर जो हासिल किया है क्या वो बिना लौटे हासिल किया जा सकता था? और अगर आज  हासिल है तो वो कब तक रहेगा? इसलिए अब और ज़्यादा इच्छा होती है की सबको छोड़कर कहीं गुम हो जाऊँ। ज़िम्मेदारियों से भागना चाहता हूँ? पता नहीं... मुझे काफी साल हो गए हैं जॉब करते हुए इसलिए कभी-कभी लगता है कब तक च...