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एक अरसे की खामोशी...

एक अरसे की खामोशी...। खामोशियाँ बिखरी थी कमरे में और उम्मीदें रौशनी बन कर चहक रही थी। एक अजब सा माहौल था कमरे में जहाँ सब होकर भी नहीं थे। सन्नाटा सा था लेकिन कहीं किसी कोने से क...